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"My art is my search for the moments beyond the ones of self knowledge. It is the rhythmic fantasy; a restless streak which looks for its own fulfillment! A stillness that moves within! An intense search for my origin and ultimate identity". - Meena

Tuesday, 7 March 2017

अक्षर

शून्य, सन्नाटा
जहाँ सब कुछ अबोध है 

और मैं निःशब्द सी
शब्द ढूढ़ती रही 
हर पल के अंतराल में 
हर सुर और ताल में 
लकीरें खींचती रही
रंग उड़ेलती रही 

शब्द ढुढती रही

वाक्यों के व्यक्तित्व 
व्याख्याओं  में लुप्त हो गए
आकृतियां लकीरों में उलझ के रह गई
रंग सूख कर काले पड़  गए  

और इन बहते क्षणों के क्षणिक आभास में 
हर पल में
क्षर होती हुई मैं 
अक्षर ढूढ़ती रही 
जो आकाश  की मिथ्या  में 
सत्य लिख दे 
नहीं मिला 

वह अक्षर मुझे नहीं मिला


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